इजहारे जज़्बात की ज़हमत कीजिये (Ghazal)

यादों का इन्द्रजाल... Hindi Poetry by Sulabh इजहारे जज़्बात की ज़हमत कीजिये मोहब्बत की है तो हिम्मत कीजिये खुदा के रहमत से कायम मोहब्बत सजदे में सर रख इबादत कीजिये मोहब्बत की मंजिल है इम्तहान लेगी ना उफ़ ना कोई शिकायत कीजिये माना की मोहब्बत में खामोश है जुबाँ चाहें तो निगाहों से शरारत कीजिये रंजिश... [पूरी पोस्ट]
writer सुलभ 'सतरंगी'

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[15 Jan 2010 08:00 AM]

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