भर्तृहरि शतक-मनुष्य के लिए में स्वाभिमान जरूरी (jivan men svabhiman jaroori-hindi sandesh

अमृत संदेश-पत्रिका लांगल चालनमधश्चरणावपातं भू मौ निपत्य बदनोदर दर्शनं च। श्चा पिण्डदस्य कुरुते गजपुंगवस्तु धीरं विलोकपति चाटुशतैश्चय भुंवते।। हिंदी में भावार्थ-श्वान भोजने देने वाले के आगे पूंछ हिलाते हुए पैरों में गिरकर पेट मूंह और पेट दिखाते हुए अपनी दीनता का प्रदर्शन... [पूरी पोस्ट]
writer दीपक भारतदीप

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[21 Jul 2009 19:31 PM]

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