कबीर के दोहे-अपनी सराहना स्वयं न करें (kabir darshan-dosron ke dosh)

अमृत संदेश-पत्रिका आपन को न सराहिये, पर निन्दिये न नहिं कोय। चढ़ना लम्बा धौहरा, ना जानै क्या होय।। संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं कि अपने मूंह से कभी आत्मप्रवंचना और दूसरे की निंदा न करें। क्योंकि कभी आचरण की ऊंचाई पर हमारे व्यकितत्व और कृतित्व को नापा गया तो तो पता नहीं... [पूरी पोस्ट]
writer दीपक भारतदीप

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[23 Sep 2009 00:10 AM]

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