नये वर्ष का कबाड़ा-हिन्दी लघु व्यंग कथा (new year after on day-hindi satire

अमृत संदेश-पत्रिका  वह दोनों लड़के हमेशा की तरह उस कालोनी में घर से बाहर पड़े कूड़े और और चौराहे पर रखे कूड़ेदानों से बेचने लायक कबाड़ छांट रहे थे।  पास से जाते हुए दो लोगों में से किसी एक को उन्होंने कहते सुना कि‘ कल से नया वर्ष 2010 लग रहा है।  आज पुराने वर्ष... [पूरी पोस्ट]
writer दीपक भारतदीप

alekhindiadeepak bharatdeepabhivyakti

views
17
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[31 Dec 2009 01:04 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix