इशारे-हिन्दी व्यंग्य कविता (ishare-hindi satire poem)

 दीपक भारतदीप की हिंदी सरिता तैश में आकर तांडव नृत्य मत करना चक्षु होते हुए भी दृष्टिहीन जीभ होते हुए भी गूंगे कान होते हुए भी बहरे यह लोग इशारे से तुम्हें उकसा रहे रहे हैं। जब तुम खो बैठोगे अपने होश, तब यह वातानुकूलित कमरों में बैठकर तमाशाबीन बन जायेंगे तुम्हें एक पुतले की तरह अपने... [पूरी पोस्ट]
writer दीपक भारतदीप

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[25 Dec 2009 06:37 AM]

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