अब हर कवि का बेटा अमिताभ बच्चन तो नहीं हो सकता?
कल बोधिसत्व भाई की अश्क जी के सन्दर्भ में लिखी पोस्ट पढ़ने के बाद मन बहुत देर तक अशांत रहा।क्या हम सचमुच अपने इतिहास, अपनी परंपरा और अपने पूर्वजों के प्रति कृतघ्ना की हद तक लापरवाह और भुलक्कड़ हैं? क्या हम बस आज में जीते हुए ज़माने की भेड़चाल में शामिल होना...
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अशोक कुमार पाण्डेय
साहित्य
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[15 Jan 2010 00:59 AM]



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