लौट चल मन!

मानसी लौट चल मनदुविधा छोड़ सबलौट चल अबसीमायें तज भटक-भटकथक कर चूरघर से दूरश्रांत मन हो शांत लौट चल अबमधुर अमृत की लालसा मेंचाह कर विष किया पानप्रीत भँवर में उलझ करमिथ्यानंद से किया स्नानग्लानिसिक्त रुदन छोडअब झूठे सब बंधन तोड़अश्रु संचयकर अंजुरि में लौट चल... [पूरी पोस्ट]
writer मानसी

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[14 Jan 2010 18:39 PM]

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