जैन:प्राचीन इतिहास-6
गतांक से आगे.....वैदिक साहित्य के यति और व्रात्य -ऋग्वेद में मुनियों के अतिरिक्त' यतियों का भी उल्लेख बहुतायत से आया है। ये यति भी ब्राह्मण परम्परा के न होकर श्रमण-परम्परा के ही साधु सिद्ध होते हैं, जिनके लिये यह संज्ञा समस्त जैन साहित्य में उपयुक्त होते...
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HEY PRABHU YEH TERA PATH
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[14 Jan 2010 15:15 PM]



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