एक सिम्‍फनी है

कुमार अम्‍बुज अकेली गहराती रात में एक खिडकी के पीछे एक अनाम लैम्‍प जल रहा है। जैसे इस लैम्‍प के जलने से ही यह रात इतनी गहरी है। लगता है कि मैं जगा हुआ हूं, अंधेरे में अपनी कल्‍पनाओं में डूबा हुआ, बस इसी वजह से ही उधर, वहां रोशनी है।शायद हर एक चीज इसलिए है क्‍योंकि कुछ... [पूरी पोस्ट]
writer कुमार अम्‍बुज

सिम्‍फनी

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[14 Jan 2010 12:55 PM]

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