नौकरशाही में तैयार हो रहा नक्सल भूमि
शाम ढलते ही सन्नाटा, चरवाहे भी गाय बैल लेकर जल्दी घर आ जाते थे और घरों के दरवाजे बंद हो जाते थे। रात में किसी का भी पदचाप सुनकर रोगंटे खडे हो जाते थे। कभी भी कहीं भी किसी की हत्या कर दी जाती थी। घर जला दिए जाते थे, मारा पीटा जाता था और लोग सब कुछ खामोस...
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EDHAR HAI
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[14 Jan 2010 09:40 AM]



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