प्रेम - 2

अपने स्कूल के दिनों में कभी-कभी रूमानी हो जाता था... कई बार तो दोस्तों के किस्से भी काफी होते थे... उदास कर जाने के लिए... सालों पहले की रूमानियत बाँट रहा हूँ अब....तुम्हारे साथ बितायाहर लम्हाठहर जाता है मेरे पाससौगात की तरह...तन्हाई में घिर जाता हैमेरा... [पूरी पोस्ट]
writer Neeraj Shrivastava / Hyderabad, Bhopal, India
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[14 Jan 2010 06:17 AM]

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