बागबां

JHAROKHA चमन आज भी खुशबुओं से गुलजार होता है ये कौन कहता है की चमन वीरान होता है जहां हर पर्व पर आज भी लगते हैं मेले जो लोगों की भीड से आबाद होता है जहां गंगा स्नान सूर्य प्रनाम की प्रथा आज भी है बनी जो जय गंगे और हर हर महादेव की नाद से गूंज उठ्ता है तीरथ धामों... [पूरी पोस्ट]
writer JHAROKHA

कविता

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[14 Jan 2010 05:34 AM]

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