९१ कोजी होम
गुलज़ार साहब का दर्द ...................................... उनका दर्द , अपनी डायरी तक रहता है ......कभी किसी से कहते नहीं .....और जब निकला भी तो सब तक पहुंचा ........ हजार रहें , मुड़ के देखी कहीं से कोई सदा न आई बड़ी वफा से निभाई तुमने हमारी थोड़ी सी...
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भंगार
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[14 Jan 2010 04:32 AM]



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