९१ कोजी होम
गुलज़ार साहब का दर्द ..........किसी से नहीं बाँटते ....उनकी शायरी में बहता हुआ ,नज़र आयेगा ...उसी दर्द को एक खूबसूरत सी माला जरुर बना देते हैं .... जैसे .......हजार राहें ,मुड के देखीं कहीं से कोई सदा न आई बड़ी वफा से निभाई तुमने हमारी थोड़ी सी बेवफाई...
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भंगार
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[14 Jan 2010 01:46 AM]



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