बेवजह तो दिल धडकता है कहां यूं जोर से

दर्पण के टुकड़े जब से वो हमसे और उनसे हम मिलने लगे जिन्दगी के सारे मायने ही बदलने लगेता उम्र तो अकेले ही तय किया सारा सफरहै खत्म होने को सफर तो हमसफर मिलने लगेबेवजह तो दिल धडकता है कहां यूं जोर से दिल की गली से लगता है वो होके गुजरने लगेयकीनन ही दिन बहारों के कुछ दूर अब... [पूरी पोस्ट]
writer Krishan lal "krishan"
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[14 Jan 2010 01:33 AM]

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