जैन:प्राचीन इतिहास-5

गातांक से आगे............केशी और ऋषभ के एक ही पुरुषवाची होने के उक्त प्रकार अनुमान करने के पश्चात् हठात् मेरी दृष्टि ऋग्वेद की एक ऐसी ऋचा पर पड़ गई जिसमें वृषभ और केशी का साथ साथ उल्लेख आया है। वह ऋचा इस प्रकार है :-ककर्दवे वृषभो युक्त आसीद्अवावचीत्... [पूरी पोस्ट]
writer HEY PRABHU YEH TERA PATH
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[14 Jan 2010 01:41 AM]

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