डुबकी लगाना भी एक कला है। थोडा पाप, थोडा पुण्य और ढेरों अहमक बातें....

सफ़ेद घर       कुंभ के समय डुबकी लगाना भी एक कला है। यकीं न हो तो एक बार आप भी हो आओ कुंभ। समझ जाएंगे कि आखिर यह कला क्यों हैं।  कोई  कुलांचे मारते हुए डुबकी लगाता है, तो कोई खडे खडे तो कभी उ हू हू कर ठंड में सिकुडते हुए।... [पूरी पोस्ट]
writer सतीश पंचम

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[13 Jan 2010 20:53 PM]

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