दूरे हुए मुझसे वो मेरे अपने थे..
कल तक जो मेरे अपने थे, साथ साथ थे, कब किनारा कर बैठे, पता ही नहीं लगा. नये नये साथी जुड़ते गये और भीड़ में खोया मैं उन पुराने साथियों के लिए बस एक भ्रम पाले जीता रहा कि वो अब भी मेरे अपने हैं, मेरे साथ में हैं.. क्यूँ मैं भीड़ में रुक कर नहीं देखता कि जिनके...
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Udan Tashtari
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[13 Jan 2010 20:00 PM]



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