कच्ची धूप

LIFE: AS I SEE IT कच्ची धूप गुनगुनी धूपभोली सी अनमनी धूपअम्बर से छन-छन के गिरतीकरवटें सी बदलती धूपपत्तों के तन से टकरातीहवा के झोंकों मे बलखातीफूलों की पंखुदी चूम करगुलशन नए खिलाती धूपकभी मेरे आँचल से छन करपलकों की चिलमन के नीचेकभी नाच कर कभी उफ़न करसपने नए दिखाती धूपनए... [पूरी पोस्ट]
writer Paridhi Jha
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[13 Jan 2010 17:07 PM]

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