अनाम

LIFE: AS I SEE IT आज फ़िर मैंने खुली आँख से सपना देखादिल ने फ़िर दूर कहीं आज वो अपना देखाधुंधला था सब कुछ पराया था जहाँमेरा कुछ भी नही कुछ और ही पाया था वहाँअकेले रास्ते गलियाँ गुम से गुमसुम मुकामकोहरे की बाहों मे लिपटे हुए किस्से तमामअँधेरी स्याह थी दुनिया -- खामोशी बसी... [पूरी पोस्ट]
writer Paridhi Jha
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[13 Jan 2010 17:11 PM]

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