संस्थाएं नारायण- परायण बनें ४

मैत्री सत्यनिष्ठा सर्वोंदय की बुनियाद है। कुछ लोग कहते हैं कि इससे सर्वोदय- समाज में अधिक लोग नहीं आएंगे। मैं कहता हूं कि ऐसा कहनेवाला भगवान की जगह लेना चाहता है पर मै। नहीं ले सकता। आखिर सभी मनुष्यों में शुभ प्रेरणा क्यों पैदा नहीं होगी ? होगी, ऐसी ही मैं आशा... [पूरी पोस्ट]
writer अतुल
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[13 Jan 2010 10:33 AM]

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