वो काटा के शोर में स्मृतियों की पतंग

मेरी डायरी आज बहुत ठंड थी। धूप खाने छत पर चला आया। दोनों बेटे और बेटी पतंग उड़ाने में मस्त थे। मैं पहुंचा तो हल्की सी मुस्कराहट के साथ देखा और फिर से नजरें टिका दीं आसमान पर। अभी ठीक से बैठा भी नहीं था कि वो काटा के शोर ने बरबस ही ध्यान खींच लिया। किसी की पतंग कट... [पूरी पोस्ट]
writer shivraj gujar

स्मृति संसार

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[13 Jan 2010 10:05 AM]

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