त्यागो शूद्रा भूमि
शूद्रा भूमि शूद्रा भूमि उसे कहें , काला होवे रंग। कड़वा-कड़वा स्वाद दे , देवे मदिरा-गंध ।। देवे मदिरा-गंध, ठीक-ठाक रहते योग। लोन लेलो भैया, लगालो एक उद्योग।। कह `वाणी´ कविराज , फिर भी बात नहीं जमी । बनाय वहाँ श्मशान, त्यागो तुम शूद्रा भूमि।। शब्दार्थ :...
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[13 Jan 2010 09:05 AM]



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