लेकिन प्यास अधूरी है
कुछ परिस्थतियाँ ऐसी बन गयीं हैं जो नये साल में कुछ नहीं लिख पाया। हो सकता है ये हालात और कुछ दिन रहे। भाई अविनाश वाचस्पति और भाई जाकिर अली रजनीश जी ने अपने अपने टिप्पणियों में कुछ नया नहीं लिखने का संकेत भी दिया। कई फोन भी आये। बस आज उन्हीं शिकायतों को...
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श्यामल सुमन
कविता
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[13 Jan 2010 08:58 AM]



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