खारे पानी की कीमत!
वह सर पर कपड़ा रखेईंटें ढो रही थी,पास ही कहींदुधमुहीं बच्ची सो रही थी।आवाजें कारीगरों कीजल्दी करोजल्दी करोबराबर आ रही थीं।सहसा सोती बच्चीरोने लगी।शायद भूखी होगी।आँचल से दूधटप-टप कर बहने लगा।परबेटी को उठा नहीं सकतीपेट उसका भर नहीं सकतीपैसे जो कट...
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रेखा श्रीवास्तव
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[13 Jan 2010 06:16 AM]



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