भटकता राही

bhawnayen अजनबी शहर में अकेला भटक रहा हूँ मैं । अन्जान राहों में अकेला भटक रहा हूँ मैं ।। ठहरे हुए इन हवाओं मे, बेवज़ह , श्वास तलाश करता भटक रहा हूँ मैं ।। पत्थर के मकान, पत्थर के भगवान । मिला जो भी यहाँ, वो भी पत्थर जैसा ।। पत्थर की हर मूरत मे, बेवज़ह, दिल तलाश... [पूरी पोस्ट]
writer deep
views
25
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
4
[13 Jan 2010 04:47 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix