लोहरी मुबारक
आया ख़ुशी का त्यौहार है,फसलों में भी लोहरी की बहार है,सरसों के खेतों से मक्के के खेतों तक, छेड़ा यह कैसा मल्हार है। नाचो गाओ धूम मचाओ, ढोल नगाड़ों पे गिद्दा पाओ। छोटे बच्चों में रेवड़ी और मूंफली बत्वाओ। कुछ देर के लिए सब परेशानियाँ भूल जाओ। मदमस्त होकर...
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पियूष अग्रवाल
हिन्दी कविता
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[13 Jan 2010 03:56 AM]



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