"टिप्पणियों के अभाव में" !!
मिलकर रहो क्या रखा है अलगाव में!!दिल की सुनो मत बहको किसी के दबाव में!!क्या हिन्दू, क्या मुस्लिम, सिक्ख ,इसाई क्या !!इंसानियत का नाता हो आत्मा के लगाव में!!प्रेम सोहार्द मिलते नहीं बाजार के भाव में !भावनाओं को मत मारो खुदगर्जी के चाव में !! जात पात घृणा...
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खुला सांड
unity
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[13 Jan 2010 03:27 AM]



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