अप्रासँगिक स्वगत कथन

कुछ तो है... जो कि, सुबह सुबह अख़बार पढ़ दिन ख़राब करने से बेहतर लत है, चिट्ठाचर्चा ! आदत के मुताबिक आज भी पलटाया तो ..  " उपस्थित श्रीमान /  मैडम  साथ एक बेहतरीन लिंक लेकर अनूप जी को पाता हूँ, ” जो कि स्वयँ में चर्चाकार का ही टैगलाइन है, और बहुत अच्छा... [पूरी पोस्ट]
writer डा. अमर कुमार

बात बेतक़ल्लुफ़

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[02 Jan 2010 11:01 AM]

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