जिन्दगी की रेल कोई पास कोई फेल
आज अभी चँद मिनटों पहले एक पोस्ट पढ़ी.. निठल्ले , सठेल्ले और …………ठल्ले उब दिनों एक गाना सुना करता था, उसे अपने हिसाब से तोड़ मरोड़ भी लिया ( अभी ईस्वामी की टिप्पणी के बाद यह अँश जोड़ा है.. धन्यवाद स्वामी ! )
तो एक गाना सुना...
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डा. अमर कुमार
सुन मेरे सँगी रे
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[02 Jan 2010 10:58 AM]



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