मिलन को आतुर पंछी
आख्यालों की गुफ्तगूतुझे सुनाऊँएक वादे कीशाख पर ठहरीमोहब्बत तुझे दिखाऊँहुस्न और इश्क कीबेपनाह मोहब्बत केनगमे तुझे सुनाऊँहुस्न : इश्क , क्या तुमने कल चाँद देखा ? मैंने उसमें तुम्हें देखाइश्क : हाँ , कोशिश की लेकिन मुझे सिर्फ तुम दिखीं चाँद कहीं नहीहुस्न :...
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वन्दना
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[13 Jan 2010 01:43 AM]



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