अमन की आशा? जब तक सांस, तब तक आस!
गुलज़ार साहब की इस बेहद खूबसूरत कविता के उस अंश पर नज़र अटक गयी।"सरहदों पे जो आये अबके तो लौट के न जाए कोई"इसमें नयी बात कुछ नहीं है, पाकिस्तानी घुसपैठिये और अवैध रूप से भारत में रह रहे पाकिस्तानियों ने तो इस बात को हमेशा से अपनाया है :)'अमन की आशा' एक...
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[13 Jan 2010 00:17 AM]



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