अमन की आशा? जब तक सांस, तब तक आस!

शब्‍दार्थ गुलज़ार साहब की इस बेहद खूबसूरत कविता के उस अंश पर नज़र अटक गयी।"सरहदों पे जो आये अबके तो लौट के न जाए कोई"इसमें नयी बात कुछ नहीं है, पाकिस्तानी घुसपैठिये और अवैध रूप से भारत में रह रहे पाकिस्तानियों ने तो इस बात को हमेशा से अपनाया है :)'अमन की आशा' एक... [पूरी पोस्ट]
writer

भारतआतंकवादपाकिस्तानशान्ति

views
35
upvote
1
downvote
0
rating
1
comments
0
[13 Jan 2010 00:17 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix