दिल हुआ आशनां !
दिल हुआ आशनां !-------------------------बुझते चरागों से उठता धुआं , कह गया अफ़साने, ....रात के !कि , इन गलियों में, कोई आकर, चला गया था !रात भी थमने लगी थी, सुनके मेरी दास्ताँ ,चाँद भी थमने लगा था, देखकर उठता धुंआ !बात वीराने में की थी, लजा कर दी थी...
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लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्`
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[12 Jan 2010 21:55 PM]



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