चिट्ठी की गरमाहट एक बार फिर महसूस करें
अब फोन, मोबाइल, वीडियो कांफ्रेंसिंग, फैक्स, ई-मेल और कूरियर का ज़माना है। वे दिन गए, जब लोगों के मशहूर होते ही उनकी चिट्ठियों के संग्रह भी किताब के रूप में छप जाया करते थे। अब तो चिट्ठी लिखना-पढ़ना आउट ऑफ फैशन है तो डाकघर और उनके लाल डिब्बे भी कल की बात...
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डाकिया बाबू
पत्रों की दुनिया
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[12 Jan 2010 21:43 PM]



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