चिरकुमार है यह प्रभाती:कुमार गंधर्व तराना

सुर-पेटी बीता दिन पं. कुमार गंधर्व की याद दिलाता रहा. 12 जनवरी को ही हमसे विदा हुए थे कुमारजी. लेकिन विदा कहाँ हुए. वे तो पूरे ठाठ से अपनी रसपूर्ण गायकी के साथ हमारे मन एक जीवंत दस्तावेज़ बन मौजूद हैं. अठारह बरस बाद भी हम कुमारजी को भूले नहीं. कबाड़ख़ाना पर जीवनसिंह... [पूरी पोस्ट]
writer संजय पटेल...

गायन.

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[12 Jan 2010 21:30 PM]

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