शरीर और मन दो अलग चीजें नहीं हैं।
योग का कहना है कि हमारे भीतर शरीर और मन, ऐसी दो चीजें नहीं हैं। हमारे भीतर चेतन और अचेतन, ऐसी दो चीजें नहीं हैं। हमारे भीतर एक ही अस्तित्व है, जिसके ये दो छोर हैं। और इसलिए किसी भी छोर से प्रभावित किया जा सकता है। तिब्बत में एक प्रयोग है, जिसका नाम...
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राजेंद्र त्यागी
चिन्तन
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[12 Jan 2010 17:30 PM]



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