माया महा ठगिनी हम जानि…

शब्‍दों का सफ़र भारतीय इतिहास की बीती दो सदियां लुटेरे पिंडारी या ठगों की करतूतों से रंगी हुई हैं। ये ठग पीढ़ी दर पीढ़ी यात्रियों के काफिलों को लूटते रहे । यात्रियों को लूटना इनकी फितरत थी और उन्हें जीवित न छोड़ना उनका धर्म। पुराने ज़मानें में यात्राएं बेहद दुरूह होती... [पूरी पोस्ट]
writer अजित वडनेरकर

government

views
42
upvote
5
downvote
0
rating
5
comments
21
[12 Jan 2010 18:56 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix