माया महा ठगिनी हम जानि…
भारतीय इतिहास की बीती दो सदियां लुटेरे पिंडारी या ठगों की करतूतों से रंगी हुई हैं। ये ठग पीढ़ी दर पीढ़ी यात्रियों के काफिलों को लूटते रहे । यात्रियों को लूटना इनकी फितरत थी और उन्हें जीवित न छोड़ना उनका धर्म। पुराने ज़मानें में यात्राएं बेहद दुरूह होती...
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अजित वडनेरकर
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[12 Jan 2010 18:56 PM]



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