नर्मदा और बचपन
नर्मदा से मेरी पहचानमाँ के द्वारा हुई । माँ की खोज ने मुझे नर्मदा से मिला दिया और अब मिलाया है तो ऐसा की ,लगता है मेरी माँ मुझे मिल गई । आज नर्मदा के किनारे पर बैठ मै अपनी सांसों की लय को जब सुनती हूँ तो अपने मै शांति से परिपूणं शक्ति का अहसास पाती हूँ...
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[12 Jan 2010 15:10 PM]



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