बचना वो हँसकर मिलता है दोनों बाहें फैलाएं

जीवन के पदचिन्ह बचना वो हँसकर मिलता है दोनों बाहें फैलाएंमुश्किल में होगा न जाने कौन सा काम बताएचुनावी मौसम था, वादों की बयार में गुजर गयाआओ अब खुद सुलझाएं अपनी अपनी समस्याएँ  रही बाट जोहती शिक्षक की किनती सारी कक्षाएँ ट्युशन से पार लगेंगी इस साल की भी परीक्षाएं सच... [पूरी पोस्ट]
writer Sudhir (सुधीर)

चिंतन

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[12 Jan 2010 14:00 PM]

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