अमन की आशा या जंग की आशा

कल हो ना हो आज बहुत दिन के बाद इस ब्लॉग पर लिख रहा हूँ .समय और माधव में व्यस्तता के चलते यहाँ लिख नहीं पा रहा था . आज अचानक लिखना कैसे हुआ , इसका भी एक कारण है , इस साल के पहले ही दिन जब अखबार हाथ में आया (टाइम्स ऑफ़ इंडिया ) तो फ्रोन्ट पेज पर लिखा था- Love... [पूरी पोस्ट]
writer mrityunjay kumar rai
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[12 Jan 2010 13:30 PM]

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