संस्थाएं नारायण-परायण बनें ३

मैत्री लोग मुझसे पूछते हैं कि आप किस प्रकार इस सर्वोदय-समाज का संगठन करने जा रहे हैं ? मैं जवाब देता हूं कि देश में आज कई संस्थाएं हैं। उनमें और एक संस्था बढ़ाना मेरा लक्ष्य नहीं है। मैं यही चाहता हूं कि जीवन को दिशा देनेवाला एक विचार अपने जीवन में दाखिल करें और... [पूरी पोस्ट]
writer अतुल
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[12 Jan 2010 12:52 PM]

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