एक पतंग उसकी थी एक पतंग मेरी थी
मैं बाज़ार मैं अपने विगयापन के कम से आया था, अहमदाबाद के बाहर का एक गाँव। बाज़ार मैं पतंग का मेला है। सनाक्रांत जो है परसों। तरह तरह के पतंग। अब इनके भी ब्रांड हो गए है। मंझे धागे के बडे बडे रील रखे हैं।कांच का पावडर , चिपकाने को फेविकोल , और धागे को रंगने...
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rajkumar jha
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[12 Jan 2010 11:41 AM]



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