मौत आई ज़रा-ज़रा करके...

मौत भी शायराना चाहता हूँ..! घर से निकले थे हौसला करके!लौट आए ख़ुदा-ख़ुदा करके!!दर्द-ऐ-दिल पाओगे वफ़ा करके! हमने देखा है तज़ुरबा करके!!लोग सुनते रहे दिमाग़ की बात!हम चले दिल को रहनुमा करके!!जिंदगी तो कभी नहीं आई! मौत आई ज़रा-ज़रा करके!! किसने पाया सुकून दुनिया में! जिंदगानी का सामना... [पूरी पोस्ट]
writer रामकृष्ण गौतम

शायरी

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[12 Jan 2010 11:13 AM]

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