नर,नारायण…नारायण…नारायण…
// व्यंग्य-प्रमोद ताम्बट // उस सज्जन पुरुष को लंपट और औरतबाज मानने के लिए तैयार नहीं है चाहे कितनी भी “बिना बाप की औलादें” आकर उसे अपना नाज़ायज़ बाप घोषित करें। चाहे कोई हथेली पर अंगार रखकर कहे या पूरा का पूरा अग्नि में खड़ा होकर मुनादी करे कि...
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व्यंग्य
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[12 Jan 2010 10:45 AM]



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