पल
इक अकेली शाम से कुछ पल तेरे,अपने लिए चुन लिए थे मैंने,उस आधे घंटे की मुलाकात मेंकई ख्वाब बुन लिए थे मैंने.कजरारी आखों से तेरी कुछसुनहरे पल समेट लिए थे मैंने.थर-थराते गुलाबी लबों से तेरे,बिखरते लफ्ज़ चुन लिए थे मैंने.गालों पे फैलती-सिमटती लाली को,सहेज के...
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●๋• नीर ஐ
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[12 Jan 2010 09:57 AM]



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