तुम अगर साथ दो
अब न जिद यूँ करो ज़िन्दगीकुछ मेरी भी सुनो ज़िन्दगीमैं अकेला शराबी नहींलड़खड़ा के चलो ज़िन्दगीमुफलिसों का खुदा है अगरमुफलिसी में रहो ज़िन्दगीबात तेरी सुनूंगा नहींबात फिर भी कहो ज़िन्दगीफिर कहाँ है तेरी वो तपिशअब तलक जिंदा देखो ज़िन्दगीमौत "दर्शन" डराती...
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नई कलम - उभरते हस्ताक्षर
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[12 Jan 2010 07:30 AM]



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