मध्य-वर्ग का मर्म-गीत
यह श्री गुरु गोबिंद सिंह हिंदी प्राइमरी स्कूल में पढ़ाई जाने वाली राइम्स में से हैअम्मा-बाबा-दादी टाइप के संबोधनों वाले बूढ़ों के ज़माने के कांपते गीतों में सेकिसी की मौज या शग़ल है ताल-बेताल-क़दमतालओह, देखो-देखो, अब भी वही सिंदूर तिलकित भालया पूरे...
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Geet Chaturvedi
कविता
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[12 Jan 2010 04:43 AM]



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