कितनी गुलामी और कब तक..

नुक्कड़ Nukkad प्रज्ञा पांडेकितनी गुलामी सहनी है स्त्री को .. सिर को कितना झुकाना है .. कब तक ..किस सीमा तक ? क्या तब तक जब तक कि वह टूट न जाये मिट न जाए? और पुरुष को कितना गर्वोन्नत होना है? वे पुरुष हैं कमाते हैं खिलाते हैं जिलाते और हम बेकार हैं ! हमारे पास किस... [पूरी पोस्ट]
writer Geetashree
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[12 Jan 2010 02:21 AM]

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