जोर-जुल्म के टक्कर में नजीर बनी जानकी

dikhsa दीक्षा Anand rai आनन्द राय, गोरखपुर जिंदगी के कठोर अनुभवों में पक कर जानकी बज्र हो गयी है। जोर जुल्म के खिलाफ वह प्रतिरोध की एक नजीर है। किसी निर्बल और असहाय के समर्थन में अपनी सेना लेकर खड़ी होती तो दबंग उससे थर्रा उठते हैं। वर्ष 2005 में उसका नाम नोबल पुरस्कार के... [पूरी पोस्ट]
writer आनन्द राय
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[12 Jan 2010 01:11 AM]

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