दिल्ली की सर्दी
घनी धुंद मैं माँ के पैरों के बीचशाल मैं लिपटे नन्हे नन्हे से जिस्मममता ने जिनका हर हिस्सा ढक रखा हैवह स्कूल चले जाते हैं,मोटर गाड़ियां राह टटोल टटोल के आगे बढती हैंचुप रहो की मुंह से धुआं निकलता हैकौन कहता है की दिल्ली की सर्दी मैं दम घुटता है।गर्म चाय...
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rajkumar jha
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[11 Jan 2010 21:51 PM]



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